स्वर्ण यक्षिणी
स्वर्ण यक्षिणी (या स्वर्णप्रभा/स्वर्णवती यक्षिणी) तंत्र साधना में धन, समृद्धि, सौंदर्य और आकर्षण प्रदान करने वाली एक अत्यंत शक्तिशाली व सौम्य दिव्य सत्ता हैं। इन्हें स्वर्ण लक्ष्मी कनकावती भी कहा जाता है। यह साधना सिद्ध होने पर साधक को अपार भौतिक सुख और आकस्मिक धन की प्राप्ति होती है। यह यक्षिणी दिव्य आभूषणों से सुसज्जित सोलह वर्षीय युवती के रूप में प्रकट होती हैं।
स्वर्ण यक्षिणी साधना के प्रमुख पहलू:
उद्देश्य: आकस्मिक धन, समृद्धि, आकर्षण, और ऐश्वर्य की प्राप्ति।
साधना का समय: शुक्रवार की रात्रि या पूर्णिमा की रात (बृहस्पति होरा में) सबसे उत्तम है।
साधना विधि: स्वच्छ स्थान पर पीले आसन पर उत्तर दिशा की ओर मुख करके बैठें। सामने सिद्ध 6-मुखी रुद्राक्ष या स्वर्ण यक्षिणी यंत्र स्थापित करें। घी का दीपक जलाकर, पूजन के बाद 11 दिनों तक प्रतिदिन 21 माला मंत्र का जाप करें।
मंत्र: ॐ ह्रीं ऐं श्रीं स्वर्णदेहे स्वर्णप्रभे दिव्ये दिव्यांगने आगच्छ आगच्छ मम दर्शनं कुरु कुरु स्वाहा॥
साधना के लक्षण: सफलता मिलने पर दिव्य सुगंध, कमरे में रोशनी या शीतलता का अनुभव हो सकता है।
विशेष निर्देश:
यह एक गुप्त साधना है, इसलिए इसका विवरण किसी को न बताएं।
साधना में एकाग्रता और गुरु (यदि हो) के मार्गदर्शन का पालन करना आवश्यक है।
यक्षिणी की साधना सामान्यतः मित्र, माता या प्रेमिका के रूप में की जाती है, जो इच्छित कार्य में सहायता करती हैं।
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धनदा रति प्रिया यक्षिणी साधना
नाम से ही समझ में आता है की ये यक्षिणी साधक की सारी आर्थिक तंगी को दूर कर उसे आर्थिक रूप से मजबूत बनाती है.अगर ये प्रसन्न हो जाये तो साधक कुबेर की भाती जीवन जीता है.
विधि:
साधना किसी भी शुभ दिन से शुरू करे या शुक्रवार से,शिवरात्रि या अच्छा मुहर्त हो उस समय रात्रि दस के बाद का हो. आसन वस्त्र पीले या लाल हो। दिशा-उत्तर ,अपने सामने बजोट पर उसी रंग का वस्त्र बिछाये जो आपने पहना है.एक ताम्र पात्र में बीज मंत्र ” हूं ” लिखे कुमकुम से और उसके ऊपर एक तील के तेल से भरा हुआ दीपक रखे।अब यथा संभव गुरु पूजन तथा गणेश पूजन करे,पारद शिवलिंग स्थापित करे वो न हो तो यँत्र रख ले, कोई भी मिठाई या गुड अर्पण करे, दीपक का पूजन करे।
तथा संकल्प ले की
“में ये प्रयोग अपनी आर्थिक कष्ट मिटाने हेतु कर रहा हु,धनदा रति प्रिया यक्षिणी मुझ पर प्रसन्न हो कर मुझे आर्थिक लाभ प्रदान करे”.
इसके बाद मंत्र सिद्ध माला से,ॐ नमः शिवाय की एक माला करे और यक्षिणी मंत्र की कम से कम ११ माला जाप करे और उसके बाद पुनः एक माला ॐ नमः शिवाय की करे।
इस तरह ये एक दिवस का प्रयोग आपको जीवन में कई लाभ प्रदान करेगा।
साधक चाहे तो अधिक जाप भी कर सकता है.प्रसाद स्वयं खा ले.नित्य एक माला जाप करते रहे तो जीवन में आने वाले आर्थिक परिवर्तन को आप स्वयं देख लेना।जाप दीपक की और देखते हुए करे और दीपक का भी सामान्य पूजन करे,यक्षिणी का स्वरुप मानकर।यदि इसी साधना को लगातार ४० दिन किया जाये तो प्रत्यक्षीकरण हो जाता है.उसमे प्रतिदिन आप २१ माला करे.यदि आप उपरोक्त विधान नहीं कर रहे है तो मात्र यँत्र की और देखते हुए ही जाप कर ले तो अनुकूलता मिलने लगती है. इस साधना की यही खास बात है की इसमें ज्यादा इसमें ज्यादा समय और धन नहीं खर्च करना पड़ता
मंत्र:
ॐ हूं ह्रीं ह्रीं ह्रीं धनदा रति प्रिया यक्षिणी इहागच्छ मम दारिद्रय नाशय नाशय सकल ऐश्वर्य देहि देहि हूं फट स्वाहा।
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